तस्करी का धुआं सरकारी फेफड़ों तक



सरकारी खजाना खाली हो रहा है, मगर तस्कर चांदी काट रहे हैं। यह सब हो रहा है तस्करी के जरिए सिगरेट को मुल्क में लाकर। नामी सिगरेट ब्रांड जब कौडिय़ों के दाम मुहैया हैं तो कोई क्यूं चूके धुआं उड़ाने से।
तस्कर देश के कायदे-कानून धुएं में उड़ाए जा रहे हैं, जबकि फेफड़े सरकार के जल रहे हैं। विश्व बाजार में सिगरेट तस्करी के गोरखधंधे से परदा उठाती प्रवीण जाखड़ की विशेष रिपोर्ट
Share on Google Plus

About Publisher

0 comments:

Post a Comment